बिहार: पथ निर्माण विभाग में करोड़ों के घोटाले का खुलासा, डिप्टी सीएम ने कार्रवाई का किया दावा

Bihar: Crores of rupees scam exposed in road construction department, Deputy CM claims action

पटना: बिहार के पथ निर्माण विभाग में 26 करोड़ रुपये के अवैध भुगतान और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। 25 दिसंबर 2024 को 1st Bihar/Jharkhand द्वारा किए गए खुलासे के बाद विभाग के भीतर हड़कंप मच गया था। मामले को दबाने की शुरुआत में कोशिश की गई, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए पथ निर्माण मंत्री और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने 28 जनवरी 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि यह घोटाला पूर्व पथ निर्माण मंत्री और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के कार्यकाल में हुआ था।

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा था, “गया पथ प्रमंडल में 26 करोड़ के अवैध भुगतान का मामला सामने आया है। एजेंसी ने गलत विपत्र प्रस्तुत कर राशि निकाली और अभियंताओं के साथ मिलीभगत कर भुगतान किया।” उन्होंने यह भी बताया कि जांच में यह बात सामने आई कि झारखंड के पाकुड़ से स्टोन चिप्स की ढुलाई को लेकर फर्जीवाड़ा किया गया था। डिप्टी सीएम ने कड़ी कार्रवाई का वादा करते हुए कहा, “हम न तो संबंधित इंजीनियर को छोड़ेंगे और न ही संवेदक को।”

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के सचिव से एक सप्ताह का समय लिया गया था, लेकिन वे अब तक कोई जानकारी नहीं दे पाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और संबंधित संवेदक को काली सूची में डाला जाएगा।

28 जनवरी 2025 को डिप्टी सीएम ने क्या कहा था?
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने तब कहा था कि पथ निर्माण विभाग में भारी वित्तीय अनियमितताओं के कारण लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजा कंस्ट्रक्शन को संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई होगी। सिन्हा ने यह भी बताया कि सांसद सुरेंद्र यादव का भी इस कंपनी से संबंध था और वे इसे संरक्षण दे रहे थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री तेजस्वी यादव के कार्यकाल में यह गड़बड़ी हुई थी, और उस समय सत्ता में बैठे लोगों ने इन घोटालों पर पर्दा डालने की कोशिश की थी।

पूरा मामला:
25 दिसंबर 2024 को 1st Bihar/Jharkhand ने खुलासा किया कि गया पथ प्रमंडल में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। इसके तहत फर्जी पत्रों के माध्यम से अवैध भुगतान किए गए। आरोप है कि पथ प्रमंडल गया के कार्यपालक अभियंता ने 2015 में झारखंड के पाकुड़ खनन अफसर से फर्जी पत्र मंगवाए और उसके आधार पर राजा कंस्ट्रक्शन कंपनी को अतिरिक्त कैरेज कॉस्ट के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान किया।

पथ प्रमंडल गया के कार्यपालक अभियंता ने 6 अगस्त 2024 को पाकुड़ के खनन अफसर से पत्रों की सत्यापन की मांग की थी, जिसमें बताया गया था कि ये सभी पत्र फर्जी हैं। पाकुड़ के खनन अधिकारी ने 8 अगस्त 2024 को यह पुष्टि की कि इन पत्रों का उनके कार्यालय से कोई संबंध नहीं है, यानी ये सभी पत्र झूठे थे।

निष्कर्ष:
यह मामला पूरी तरह से एक गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत देता है, जिसमें एक निर्माण कंपनी ने सरकारी पैसे का ग़लत तरीके से फायदा उठाया। जांच जारी है और डिप्टी सीएम ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि इस घोटाले में शामिल सभी जिम्मेदारों को सजा मिल सके।

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